Gesu-e-Tabdar Ko | गेसू-ए-ताबदार को
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Bal-e-Jibreel
गेसू-ए-ताबदार को और भी ताबदार कर
होशो ख़िरद शिकार कर, क़ल्ब-ओ-नज़र शिकार कर.
इश्क़ भी हो हिजाब में, हुस्न भी हो हिजाब में
या तू ख़ुद आशकार हो, या मुझे आशकार कर.
तू है मुहीत-ए-बे- कराँ, मैं हूँ ज़रा सी आबजू
या मुझे हम-किनार कर या मुझे बे-किनार कर
मैं हूँ सदफ़ तो तेरे हाथ मेरे गौहर की आबरू
मैं हूँ ख़ज़फ़ तो तू मुझे गौहर-ए-शाह्वार कर.
नग़मा-ए-नौबहार अगर मेरे नसीब में न हो
इस दम-ए-नीम सोज़ को ताइर्के बहार कर.
बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ
कार-ए-जहाँ दराज़ है, अब मेरा इन्तेज़ार कर.
रोज़-ए-हिसाब जब मेरा पेश हो दफ़्तर-ए-अमल
आप भी शर्मसार हो, मुझको भी शर्मसार कर.
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होशो ख़िरद शिकार कर, क़ल्ब-ओ-नज़र शिकार कर.
इश्क़ भी हो हिजाब में, हुस्न भी हो हिजाब में
या तू ख़ुद आशकार हो, या मुझे आशकार कर.
तू है मुहीत-ए-बे- कराँ, मैं हूँ ज़रा सी आबजू
या मुझे हम-किनार कर या मुझे बे-किनार कर
मैं हूँ सदफ़ तो तेरे हाथ मेरे गौहर की आबरू
मैं हूँ ख़ज़फ़ तो तू मुझे गौहर-ए-शाह्वार कर.
नग़मा-ए-नौबहार अगर मेरे नसीब में न हो
इस दम-ए-नीम सोज़ को ताइर्के बहार कर.
बाग़-ए-बहिश्त से मुझे हुक्म-ए-सफ़र दिया था क्यूँ
कार-ए-जहाँ दराज़ है, अब मेरा इन्तेज़ार कर.
रोज़-ए-हिसाब जब मेरा पेश हो दफ़्तर-ए-अमल
आप भी शर्मसार हो, मुझको भी शर्मसार कर.
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